AD EDUXIAN JOURNAL

(A QUARTERLY MULTIDISCIPLINARY BLIND PEER REVIEWED & REFEREED ONLINE INTERNATIONAL JOURNAL)
YEAR: 2024 E- ISSN:3048-7951

संस्कृत साहित्य में रस सिद्धान्त का विश्लेषणात्मक अध्ययन

Acceptance: 19/06/2026

Published: 06/07/2026

Abstract

संस्कृत साहित्य में रस सिद्धान्त भारतीय काव्यशास्त्र का सर्वाधिक प्राचीन, प्रधान एवं प्रभावशाली सिद्धान्त है, जिसे काव्य की आत्मा के रूप में स्वीकार किया गया है जो काव्य को रम्य एवं जीवन्त बनाता है । रस सिद्धान्त के प्रारम्भिक आचार्य भरतमुनि ने स्व रचित ग्रन्थ नाट्यशास्त्र में रस सिद्धान्त को उद्धृत किया तथा सम्बन्धित रस-सूत्र देते हुये कहा “विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः” अर्थात् विभाव, अनुभाव तथा व्यभिचारिभाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है । स्थायी भाव के साथ विभाव, अनुभाव तथा व्यभिचारिभाव के संयोग से रस की उत्पत्ति को स्वीकारा गया है । आचार्य अभिनवगुप्त ने स्वग्रन्थ अभिनवभारती में रस को चित्त की एक अलौकिक अनुभूति के रूप में स्थापित किया तथा शान्त रस को नौवें रस के रूप में स्थापित कर रस सिद्धान्त को आध्यात्मिक आयाम प्रदान किया । आचार्य भरतमुनि व आचार्य अभिनवगुप्त के अतिरिक्त आनन्दवर्धन, मम्मट, विश्वनाथ, जगन्नाथ, भट्ट लोल्लट, शंकुक, भट्ट नायक आदि रसवादी आचार्यों ने रस के सम्बन्ध में अपने-अपने महत्त्वपूर्ण मत उपस्थित किये हैं । रस सिद्धान्त केवल सौन्दर्यबोध ही नहीं, बल्कि मानवीय भावनाओं के सार्वभौमिकरण व आध्यात्मिक मुक्ति का भी माध्यम है । इस शोध का मुख्य उद्देश्य रस सिद्धान्त का विश्लेषणात्मक अध्ययन करना है, जिसमें इसके विकास, प्रमुख आचार्यों के मतों, रस-निष्पत्ति तथा साहित्यिक-नाट्य अनुप्रयोगों का परीक्षण किया गया है । यह शोधालेख विविध आचार्यों के मतों के आधार पर रस के स्वरूप, कार्य, तथा संस्कृत साहित्य में इसकी प्रस्तुति पर केन्द्रित है । रस की अभिव्यक्ति किस प्रकार काव्य में प्रभावशाली होता है, इसका अध्ययन विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से इस शोधालेख में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जायेगा । प्रस्तुत शोधालेख रस का विस्तृत विवेचन करते हुये संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करने का एक प्रयास मात्र है ।

Author Name:

अविनाश कुमार पाण्डेय

Pages:

544-554

DOI Number:

10.5281/zenodo.21225080

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Writer Name

अविनाश कुमार पाण्डेय

Pages

544-554

DOI Numbers

10.5281/zenodo.21225080

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