संस्कृत साहित्य में रस सिद्धान्त भारतीय काव्यशास्त्र का सर्वाधिक प्राचीन, प्रधान एवं प्रभावशाली सिद्धान्त है, जिसे काव्य की आत्मा के रूप में स्वीकार किया गया है जो काव्य को रम्य एवं जीवन्त बनाता है । रस सिद्धान्त के प्रारम्भिक आचार्य भरतमुनि ने स्व रचित ग्रन्थ नाट्यशास्त्र में रस सिद्धान्त को उद्धृत किया तथा सम्बन्धित रस-सूत्र देते हुये कहा “विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः” अर्थात् विभाव, अनुभाव तथा व्यभिचारिभाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है । स्थायी भाव के साथ विभाव, अनुभाव तथा व्यभिचारिभाव के संयोग से रस की उत्पत्ति को स्वीकारा गया है । आचार्य अभिनवगुप्त ने स्वग्रन्थ अभिनवभारती में रस को चित्त की एक अलौकिक अनुभूति के रूप में स्थापित किया तथा शान्त रस को नौवें रस के रूप में स्थापित कर रस सिद्धान्त को आध्यात्मिक आयाम प्रदान किया । आचार्य भरतमुनि व आचार्य अभिनवगुप्त के अतिरिक्त आनन्दवर्धन, मम्मट, विश्वनाथ, जगन्नाथ, भट्ट लोल्लट, शंकुक, भट्ट नायक आदि रसवादी आचार्यों ने रस के सम्बन्ध में अपने-अपने महत्त्वपूर्ण मत उपस्थित किये हैं । रस सिद्धान्त केवल सौन्दर्यबोध ही नहीं, बल्कि मानवीय भावनाओं के सार्वभौमिकरण व आध्यात्मिक मुक्ति का भी माध्यम है । इस शोध का मुख्य उद्देश्य रस सिद्धान्त का विश्लेषणात्मक अध्ययन करना है, जिसमें इसके विकास, प्रमुख आचार्यों के मतों, रस-निष्पत्ति तथा साहित्यिक-नाट्य अनुप्रयोगों का परीक्षण किया गया है । यह शोधालेख विविध आचार्यों के मतों के आधार पर रस के स्वरूप, कार्य, तथा संस्कृत साहित्य में इसकी प्रस्तुति पर केन्द्रित है । रस की अभिव्यक्ति किस प्रकार काव्य में प्रभावशाली होता है, इसका अध्ययन विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से इस शोधालेख में प्रस्तुत करने का प्रयास किया जायेगा । प्रस्तुत शोधालेख रस का विस्तृत विवेचन करते हुये संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करने का एक प्रयास मात्र है ।
• भरतमुनि, नाट्यशास्त्र, शास्त्री, बाबूलाल शुक्ल(व्या॰), वाराणसी, चौखम्भा संस्कृत संस्थान, 2024
• भरतमुनि, नाट्यशास्त्र, द्विवेदी पारसनाथ(सम्पादक व व्याख्या), वाराणसी, सम्पूर्णानन्दसंस्कृतविश्वविद्यालय, 2015
• आनन्दवर्धन, ध्वन्यालोक, पाठक, जगन्नाथ(हिन्दी व्या॰), वाराणसी, चौखम्बा विद्याभवन, 2006
• मम्मट, काव्यप्रकाश, विश्वेश्वर, आचार्य(व्या॰), वाराणसी, ज्ञानमण्डल लिमिटेड, 2022
• विश्वनाथ साहित्यदर्पण, लोकमणिदाहाल आचार्य, द्विवेदी त्रिलोकीनाथ, द्विवेदी शिवप्रसाद(व्याo), वाराणसी, चौखम्भा संस्कृत संस्थान, 2022
• गिरि, विद्यानन्द, तैत्तिरीयोपनिषद्, ऋषिकेश, श्रीकैलाश विद्या प्रकाशन, 2015
• धनंजय, दशरूपकम्, त्रिपाठी रमाशंकर,(व्या॰), वाराणसी, विश्वविद्यालय प्रकाशन, 2001
• भामह, काव्यालंकार, देवेन्द्रनाथ शर्मा (व्या॰), पटना, बिहार-राष्ट्रभाषा-परिषद, 1906
• रुद्रट, काव्यालंकार, चौधरी सत्यदेव(हिन्दी व्याख्या), दिल्ली, वासुदेव प्रकाशन, 1965
• दण्डी, काव्यादर्श, मिश्र, रामचन्द्र(व्या॰), वाराणसी, चौखम्बा विद्याभावन, 1996
• शिंगभूपाल, रसार्णवसुधाकर, पाठक जमुना(सम्पादक व व्याख्या), वाराणसी, चौखम्भा संस्कृत सीरीज आफिस, 2024
• कालिदास, अभिज्ञानशाकुन्तलम्, राय डॉ. गंगासागर(व्या॰), वाराणसी, चौखम्भा संस्कृत भवन ग्रन्थमाला, 2000
• कालिदास, रघुवंशम्, मिश्र, पण्डितजगदीश(सम्पादक), गोपालगंज, बिहार, मङ्गल प्रकाशन, 2015
• भवभूति, उत्तररामचरितम्, पाण्डेय रामअवध, मिश्र रविनाथ(व्याo), वाराणसी, विश्वविद्यालय प्रकाशन, 2003
• कालिदास, कुमारसम्भवम्, पाण्डेय, श्रीप्रद्युम्न(व्या॰), वाराणसी, चौखम्बा विद्याभावन, 2006
• भवभूति, मालतीमाधवम्, त्रिपाठी, रामप्रताप(अनुवादक, सम्पादक), इलाहाबाद, लोकभारती प्रकाशन, 1973
• कालिदास, मेघदूतम्, शास्त्री वैद्यनाथ झा(व्या॰), वाराणसी, कृष्णदास अकादमी, 2002
अविनाश कुमार पाण्डेय
544-554
10.5281/zenodo.21225080
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