मनोविज्ञान एक वैज्ञानिक अनुशासन है, जिसमें मानव व्यवहार, मानसिक प्रक्रियाओं और व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों का वस्तुनिष्ठ अध्ययन किया जाता है। इस अध्ययन की आधारशिला ‘मनोवैज्ञानिक शोध समस्या’ होती है। किसी भी शोध कार्य की गुणवत्ता, उपयोगिता और वैज्ञानिकता इस बात पर निर्भर करती है कि शोध समस्या कितनी स्पष्ट, सुसंगत, मापनयोग्य और शोध योग्य है। प्रस्तुत अध्याय का मुख्य उद्देश्य मनोवैज्ञानिक शोध समस्या की अवधारणा, उसकी आवश्यकता तथा शोध अभिकल्प और प्रतिचयन की वैज्ञानिक प्रक्रिया का व्यवस्थित एवं तार्किक विवेचन करना है।
अध्याय में यह स्पष्ट किया गया है कि शोध समस्या केवल एक प्रश्न नहीं होती, बल्कि यह अध्ययन की दिशा, सीमा और संरचना निर्धारित करती है। शोध समस्या का उचित चयन शोध के उद्देश्यों, परिकल्पनाओं, शोध विधि, शोध उपकरण, आँकड़ा-संग्रह एवं विश्लेषण की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। यदि शोध समस्या अस्पष्ट या अवैज्ञानिक हो, तो संपूर्ण शोध प्रक्रिया प्रभावित होती है और निष्कर्ष अविश्वसनीय हो सकते हैं।
अध्याय में मनोवैज्ञानिक शोध में प्रयुक्त प्रमुख शोध अभिकल्पों—वर्णनात्मक, प्रायोगिक, सहसंबंधात्मक तथा सर्वेक्षणात्मक—का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यह बताया गया है कि किस प्रकार शोध अभिकल्प शोध समस्या की प्रकृति के अनुसार चयनित किया जाना चाहिए, ताकि शोध निष्कर्ष अधिक वैध और विश्वसनीय हों। साथ ही, प्रतिचयन (Sampling) की वैज्ञानिक प्रक्रिया को विशेष महत्व दिया गया है। जनसंख्या और नमूने के बीच संबंध को स्पष्ट करते हुए यादृच्छिक, स्तरीकृत, उद्देश्यपरक एवं प्रणालीबद्ध प्रतिचयन विधियों को उदाहरणों सहित समझाया गया है। उचित प्रतिचयन विधि का चयन शोध परिणामों की सामान्यीकरण क्षमता को सुदृढ़ करता है।
यह अध्याय मनोविज्ञान, शिक्षाविज्ञान तथा सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में शोध करने वाले B.Ed., M.Ed., Ph.D. शोधार्थियों एवं नवोदित शोधकर्ताओं के लिए शोध प्रक्रिया को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।
मुख्य बिंदु: मनोवैज्ञानिक शोध समस्या, शोध अभिकल्प, प्रतिचयन प्रक्रिया, अनुसंधान विधि, वैधता एवं विश्वसनीयता, वैज्ञानिक शोध|