विकसित भारत की अवधारणा केवल प्रयोगशालाओं या कक्षाओं में नहीं बनेगी वह उन युवा शोधकर्ताओं के मन और हृदय में जन्म लेगी जो अलग सोचने का साहस रखते हैं, आज हम पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और एक टिकाऊ भविष्य की तलाश कर रहे हैं। मानव और पर्यावरण के बीच अन्तः क्रिया को समझना महत्वपूर्ण है, इस लेख के माध्यम से हम पर्यावरण परिस्थितिकी और सतत विकास की अवधारणा का विस्तार से अध्ययन करेंगे तथा हम अपने ग्रह को संरक्षित करने और हरित जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए व्यवहारिक कदमों की जाँच करेगें।
शंकर लाल
377-378
10.5281/zenodo.18072761