इस शोध-पत्र में हिंदी भक्ति साहित्य में उपस्थित स्त्री स्वर का अध्ययन वर्तमान महिला सशक्तिकरण आंदोलन के संदर्भ में किया गया है। मध्यकालीन भारतीय समाज में स्त्रियाँ सामाजिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक बंधनों से घिरी हुई थीं, किंतु भक्ति आंदोलन ने उन्हें अभिव्यक्ति का एक वैकल्पिक मंच प्रदान किया। विशेषतः मीरा, अक्का महादेवी, ललद्यद तथा बहनाबाई जैसी संत कवयित्रियों ने अपने काव्य के माध्यम से पितृसत्तात्मक व्यवस्था, सामाजिक असमानता तथा स्त्री दमन का प्रतिरोध किया। यह शोध भक्ति साहित्य में स्त्री चेतना, आत्म-अभिव्यक्ति, आध्यात्मिक स्वतंत्रता तथा सामाजिक विद्रोह के स्वर को आधुनिक महिला सशक्तिकरण आंदोलन से जोड़कर देखता है। अध्ययन में स्त्रीवाद, सांस्कृतिक अध्ययन तथा साहित्यिक आलोचना की पद्धतियों का उपयोग किया गया है। शोध का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि भक्ति साहित्य केवल धार्मिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि स्त्री स्वतंत्रता और सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम भी था। वर्तमान समय में लैंगिक समानता, शिक्षा, अधिकार चेतना तथा आत्मनिर्णय के प्रश्नों को समझने में भक्ति साहित्य अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध होता है।
प्राथमिक स्रोत
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द्वितीयक स्रोत
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शोध आलेख एवं जर्नल स्रोत
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एनुअल रिपोर्ट 2022-23. नेशनल कमीशन फॉर विमेन, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया, 2023
डॉ प्रदीप कुमार
181-191
10.5281/zenodo.20174715
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