शिक्षा जन्म से लेकर मृत्यु तक निरंतर चलने वाली क्रमिक सोद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया है। जिसके द्वारा व्यक्ति की समस्त जन्मजात एवं अंतर्निहित शक्तियों का समग्र विकास कर उसके व्यवहार में परिमार्जन किया जाता है। प्राथमिक शिक्षा के उपरांत माध्यमिक शिक्षा की शुरुआत होती है। माध्यमिक स्तर की शिक्षा विद्यार्थी के जीवन का महत्वपूर्ण चरण है, क्योंकि माध्यमिक स्तर पर सोचने, समझने, सामाजिक व्यवहार, आत्मनिर्भरता, चरित्र निर्माण तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता है, जो आगे आने वाले जीवन की आधारशिला होती है। शिक्षा ग्रहण करने में भाषा की प्रमुख भूमिका होती है। यदि व्यक्ति को किसी भी भाषा पर कुशलता या निपुणता प्राप्त है, तो वह किसी भी विषय को आसानी से समझ एवं सीख सकता है। इसके साथ अध्ययन आदतों का शिक्षा में विशेष योगदान होता है। अच्छी अध्ययन आदत अच्छे परिणाम प्राप्त करने में सदैव सहायता प्रदान करती है। प्रस्तुत शोध-पत्र में माध्यमिक स्तर पर बालकों की शिक्षा में भाषा तथा अध्ययन आदतों का क्या योगदान होता है, इस पर विचार किया गया है।
### संदर्भ
1. **सिंह, अरुण कुमार।** *शिक्षा मनोविज्ञान*। भारतीय भवन एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स, दरियागंज, नई दिल्ली–110002, संस्करण 2010।
2. **गुप्ता, एस.पी. / गुप्ता अलका।** *उच्चतर शिक्षा मनोविज्ञान: सिद्धांत एवं व्यवहार*। शारदा पुस्तक भवन, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश, संस्करण 2019।
3. **भाई योगेन्द्र जीत।** *भाषा का शिक्षण शास्त्र*। अग्रवाल पब्लिकेशन, संस्करण प्रथम, 2014।
4. **एस. के. मंगल।** *शिक्षा मनोविज्ञान*। संस्करण 2013।
अनिल कुमार कश्यप ; प्रो. डॉ. बेबी कुमारी
240-243
10.5281/zenodo.23089053
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