73वें संविधान संशोधन केे द्वारा पंचायती-राज व्यवस्था के अंतर्गत आरक्षण सम्बन्धी प्रावधानों ने अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक उत्थान और राजनीतिक भागीदारी में महत्वपूर्ण योगदान दिया है जिससे स्थानीय स्तर पर निर्णय प्रक्रिया में इन समुदाय के लोगों की सहभागिता एवं प्रतिनिधित्व में वृद्धि हुई है। जनगणना वर्ष 2011 के अनुसार 705 से अधिक जनजातियों को अनुसूचित जनजाति (ैज्) का दर्जा प्रदान किया गया है, जिसमें 75 जनजातियाँॅं ऐसी हैं जिन्हें विशेष रूप से कमजोर या अत्यंत पिछड़ी हुई जनजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया हैए और कमार जनजाति छत्तीसगढ़ की इन्ही पिछड़ी हुई जनजातियों का हिस्सा है। प्रस्तुत अध्ययन में द्वितीयक स्रोतों के अध्ययन और उनके विश्लेषण के माध्यम से यह विमर्श किया गया है कि पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से कमार जनजाति समुदाय के लोगों के जीवन स्तर में महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं। पंचायती राज संस्थाओं ने कमार जनजाति के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं आधारभूत सुविधाओं में कुछ सकारात्मक सुधार हुए हैं साथ ही सक्रिय राजनीति तथा सरकारी योजनाओं केे प्रति जागरूकता को बढ़ाया है, किन्तु अशिक्षा, जागरूकता की कमी, प्रशासनिक समस्याएँ एवं सीमित संसाधनों के कारण विकास अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच पाया है उनके विकास के मार्ग में शैक्षिक,सामाजिक.आर्थिक पिछड़ापन जैसी चुनौतियाँ आज भी बनी हुई हैं।
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महेन्द्र कुमार सिन्हा ; प्रो. (डॉ.) मनीष कुमार पाण्डेय
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