वर्तमान समय में एक गंभीर वैश्विक चुनौती के रूप में जलवायु संकट उभरकर सामने आया है, जो समूचे विश्व के प्राकृतिक संसाधनों, मानवीय जीवन एवं पारिस्थितिक संतुलन को पूरी तरह से प्रभावित कर रहा है। उपर्युक्त समस्या के समाधान हेतु आज के समय में केवल वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपाय पर्याप्त नहीं दिखाई देते, बल्कि आज आवश्यकता है तो मानवीय जीवनशैली, व्यवहार एवं दृष्टिकोण में परिवर्तन की। प्रस्तुत शोध का मुख्य एवं एकमात्र उद्देश्य जलवायु संकट के संदर्भ में मानवीय विकास तथा संतुलित जीवन के निर्माण हेतु शिक्षा की भूमिका का विश्लेषणात्मक अध्ययन करना है। परिणामतः दृष्टिगोचर होता है कि शिक्षा के द्वारा मूल्य विकास, जागरूकता तथा सतत जीवनशैली को प्रोत्साहित कर जलवायु संकट के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। प्रस्तुत शोध अध्ययन पूर्णतः द्वितीयक स्रोतों, वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक पद्धति पर आधारित है। इस शोध अध्ययन से स्पष्ट होता है कि शिक्षा ही वह प्रमुख माध्यम है जिसके द्वारा मानवीय व्यवहार में परिवर्तन कर जलवायु संकट को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
आपके द्वारा दिया गया संदर्भ (References) यूनिकोड हिंदी में इस प्रकार है:
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कुमारी महिमा
561-566
10.5281/zenodo.21279558
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