प्रस्तुत आलेख भारतीय शिक्षा व्यवस्था में गुरुकुल कल से औपनिवेशिक काल होते हुए आधुनिक भारतीय शिक्षा तक शिक्षण शास्त्रीय उपागम एवं शिक्षण तकनीक में हुए परिवर्तनों का तुलनात्मक एवं आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। लेख में गुरुकुल की समग्र अनुभावात्मक एवं जीवनोपयोगी, औपनिवेशिक शिक्षा की शिक्षक केंद्रित एवं अंक आधारित परीक्षा परिणाम केंद्रित प्रवृत्ति तथा आधुनिक भारतीय शिक्षा की बाल केंद्रित एवं अनुभवात्मक अधिगम की प्रवृत्ति का विश्लेषण किया गया है। पाँल फ्रेरे के बैंकिंग कांसेप्ट ऑफ़ एजूकेशन के माध्यम से निष्क्रिय एवं सूचना केंद्रित अधिगम की सीमाओं को समझने का प्रयास किया गया है। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा द्वारा अपेक्षित शिक्षण शास्त्रीय परिवर्तन तथा शिक्षार्थी केंद्रित अनुभवात्मक एवं दक्षता आधारित अधिगम प्रतिफल को रेखांकित किया गया है।अंतत लेख यह विवेचित करता है,कि कक्षा में अपनाया जाने वाला शिक्षण शास्त्रीय उपागम किस प्रकार भावी नागरिक एवं राष्ट्र निर्माण में सहायक सिद्ध हो सकता है।
संदर्भ सूची
फेरे पॉल, (1970), पेडागोजी ऑफ ऑपरेस्ड, न्यू यॉर्क।
डीवी जॉन, (1938), एक्सपीरियंस एंड एजुकेशन, न्यू यॉर्क
भारत सरकार,कोठारी आयोग रिपोर्ट, नई दिल्ली
भारत सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, नई दिल्ली
गांधी एम के, बुनियादी शिक्षा (नई तालीम)
टैगोर रविंद्रनाथ, शिक्षा संबंधी निबंध।
डॉ संजय कुमार गुप्ता
169-172
10.5281/zenodo./22770703
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