प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के बी.एड. छात्राध्यापकों की सृजनशीलता में अंतर की सार्थकता का तुलनात्मक अध्ययन करना है। वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में सृजनशीलता को एक महत्वपूर्ण शैक्षिक गुण माना जाता है, क्योंकि यह भावी शिक्षकों में नवीन चिंतन, मौलिकता, कल्पनाशीलता, समस्या-समाधान तथा नवीन शिक्षण-विधियों के प्रयोग की क्षमता विकसित करने में सहायक होती है। इस अध्ययन में उत्तर प्रदेश के वाराणसी मंडल के महाविद्यालयों में बी.एड. कार्यक्रम में अध्ययनरत कला वर्ग के कुल 300 छात्राध्यापकों का चयन स्तरीकृत यादृच्छिक प्रतिचयन विधि द्वारा किया गया, जिसमें 150 ग्रामीण एवं 150 शहरी छात्राध्यापक सम्मिलित थे। सृजनशीलता के मापन हेतु डॉ. के. एन. शर्मा द्वारा निर्मित बैटरी ऑफ डाइवर्जेंट प्रोडक्शन एबिलिटीज (क्च्।) का प्रयोग किया गया। अध्ययन के निष्कर्षों के अनुसार ग्रामीण छात्राध्यापकों का औसत सृजनशीलता अंक 82.39 तथा मानक विचलन 20.069 पाया गया, जबकि शहरी छात्राध्यापकों का औसत 84.85 तथा मानक विचलन 21.032 प्राप्त हुआ। दोनों समूहों के औसत अंकों के मध्य अंतर की सार्थकता ज्ञात करने के लिए ब्.त्. परीक्षण का प्रयोग किया गया, जिसमें ब्.त्. मान 1.037 प्राप्त हुआ, जो 0.05 स्तर पर सांख्यिकीय रूप से सार्थक नहीं था। अतः अध्ययन से यह निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि ग्रामीण एवं शहरी बी.एड. छात्राध्यापकों की सृजनशीलता में कोई सार्थक अंतर नहीं है।
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प्रियंका पाण्डेय और प्रो. अजय कुमार दुबे
154-158
10.5281/zenodo./22472620
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