प्रस्तुत शोध-पत्र में महाभारत एवं कौटिलीय अर्थशास्त्र में प्रतिपादित राजनीतिक सिद्धान्तों का तुलनात्मक एवं समीक्षात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य महाभारत एवं अर्थशास्त्र में वर्णित राजनीति, राजधर्म, दण्डनीति, विदुरनीति, सप्ताङ्ग सिद्धान्त, मण्डल सिद्धान्त, षाड्गुण्य नीति, सुशासन, कूटनीति, गुप्तचर व्यवस्था, सैन्य रणनीति के सिद्धान्तों का विश्लेषण करते हुए समकालीन शासन-व्यवस्था में उनकी प्रासंगिकता को ज्ञात करना है। प्राचीन ग्रन्थों में महाभारत भारतीय संस्कृति का विश्व कोष कहा जाता है। महाभारत की महानता "यन्न भारते तन्न अन्यत्र, यन्नेहास्ति न तत्क्वचित्" से समझी जा सकती है। महाभारत का मुख्य विषय धर्म, न्याय, युद्ध, राजनीति, लोक कल्याण आदि माना जाता है। महाभारत में कौरवों एवं पांडवों के मध्य युद्ध दिखाकर अधर्म की धर्म पर विजय का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। जबकि कौटिल्य द्वारा रचित अर्थशास्त्र राज्य, प्रशासन, राजनीति, कूटनीति, सैन्य रणनीति, गुप्तचर प्रणाली, मण्डल सिद्धांत पर आधारित राजनीतिक दृष्टिकोण का प्रतिपादन करने वाला एक व्यापक ग्रन्थ है। महाभारत एवं अर्थशास्त्र में वर्णित सिद्धांत समकालीन लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था, सुशासन, नैतिक उत्तरदायित्व, पारदर्शिता आदि की स्थापना में उपयोगी सिद्ध होते हैं। प्रस्तुत शोध पत्र प्राचीन राजनीतिक परंपरा के द्वारा समकालीन राजनीति में आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
अर्थशास्त्रम् 1/14/10
अर्थशास्त्रम् 2/25/16
अर्थशास्त्रम् 1/6/1
अर्थशास्त्रम् 6/97/8
अर्थशास्त्रम् 6/97/9
अर्थशास्त्रम् 6/97/10
अर्थशास्त्रम् 7/98/2
महाभारतम्, शान्तिपर्व 67/59
महाभारतम्, शान्तिपर्व 15/30
किरातार्जुनीयम् 1/13
महाभारतम्, उद्योगपर्व 35/58)
महाभारत कर्ण पर्व 69/59
महाभारत वनपर्व 313/128
महाभारत शांति पर्व 57/11
महाभारत शांति पर्व 57/33
अर्थशास्त्रम् 2/25/15
महाभारत शांति पर्व 57/16
अंजलि रानी
62-70
10.5281/zenodo.22036540
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