AD EDUXIAN JOURNAL

(A QUARTERLY MULTIDISCIPLINARY BLIND PEER REVIEWED & REFEREED ONLINE INTERNATIONAL JOURNAL)

YEAR: 2024

E- ISSN:3048-7951

मिथिला संस्कृतिः पर्यावरण, पर्यटन और विकास

Abstract

यह लेख मिथिला क्षेत्र की प्रकृति, संस्कृति, परंपरा और आधुनिक चुनौतियों का समग्र वर्णन करता है। मिथिला को देवी सीता और राजा जनक की भूमि माना जाता है, इसलिए यहाँ लोक-संस्कृति, पर्यावरण, कृषि और अध्यात्म का गहरा संबंध है। समय के साथ मिथिला में कई परिवर्तन आए हैं, जिनमें पारंपरिक कला, भोजन, भाषा, बोली तथा सामाजिक संरचना पर आधुनिकता का प्रभाव स्पष्ट दिखता है। मिथिला का भूगोल, मौसम, नदियाँ और उपजाऊ भूमि इसे प्राकृतिक रूप से समृद्ध बनाते हैं। यहाँ की जलवायु, मिथिला पेंटिंग, पारंपरिक खेती, लोककला, और लोकपर्व पर्यटन की दृष्टि से भी विशेष महत्व रखते हैं। साथ ही, मखाना, पान, अमरूद जैसे स्थानीय उत्पादों ने इस क्षेत्र को विशिष्ट पहचान दी है। लेख में बताया गया है कि आज मिथिला व्यापार, कृषि, शिक्षा, ऑफिस-कल्चर और पर्यावरण के मामले में तेजी से बदलाव देख रहा है। नयी पीढ़ी फैशन, खान-पान और जीवनशैली में पश्चिमी प्रभाव से प्रभावित है, जिसके चलते लोकभाषा और कई परंपराएँ कमजोर पड़ती जा रही हैं। पर्यटन की दृष्टि से, मिथिला के धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक स्थान, प्राकृतिक सुन्दरता और सांस्कृतिक विरासत अद्वितीय हैं। यह क्षेत्र बिहार-जैसे राज्य की पहचान बनाने में सक्षम है, जैसे गुजरात को "गांधी", उत्तर प्रदेश को "भगवान राम", और दिल्ली को "लाल क़िला" पहचान देता है। मिथिला भी अपनी सीतामढ़ी, जनकपुर, मधुबनी कला, पान, मखाना और लोकसंस्कृति के माध्यम से वैश्विक पर्यटन केंद्र बन सकता है। लेख में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विकास कार्यों में राजनीतिज्ञों और धर्मगुरुओं के सकारात्मक प्रयास से मिथिला को नई पहचान और गति मिल रही है। अंत में यह संदेश दिया गया है कि प्रकृति और संस्कृति का संरक्षण, शिक्षा, रोजगार और कृषि में सुधार से ही मिथिला अपने गौरवशाली इतिहास और आधुनिक विकास के बीच संतुलन बना पाएगा।

Keynote: मिथिला की सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक पर्यावरण और भूगोल, कृषि और स्थानीय उत्पाद, आधुनिकता का प्रभाव, पर्यटन की संभावनाएँ, पर्यावरण और विकास, सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियाँ, राजनीतिज्ञों और समाज का योगदान, मिथिला की भविष्य संभावनाएँ

Acceptance: 27/08/2025

Published: 04/09/2025

Writer Name

डाॅ0 राम विनय ठाकुर

Pages

237-249

DOI Numbers

12.2025-91627968