प्रस्तुत आलेख हिंदी कथा साहित्य की महत्वपूर्ण कथाकार मालती जोशी की कहानियों में निहित सामाजिक यथार्थ का विश्लेषण करता है । मालती जोशी का कथा-संसार मुख्यतः मध्यवर्गीय जीवन, स्त्री-अनुभव, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक नैतिकता के दबावों से निर्मित है। उनकी कहानियाँ समाज के बाह्य स्वरूप के बजाय व्यक्ति के आंतरिक संघर्षों और मानसिक द्वंद्वों के माध्यम से सामाजिक संरचनाओं को उद्घाटित करती हैं। इस आलेख में यह प्रतिपादित किया गया है कि मालती जोशी सामाजिक यथार्थ को किसी वैचारिक नारे या आंदोलनात्मक दृष्टि से नहीं, बल्कि जीवन की सहज अनुभूतियों के आधार पर प्रस्तुत करती हैं। उनकी स्त्री पात्र पितृसत्तात्मक व्यवस्था, आर्थिक निर्भरता और पारिवारिक अपेक्षाओं के बीच अपनी पहचान की तलाश करती दिखाई देती हैं । साथ ही, लेख में मध्यवर्गीय समाज की असुरक्षा, आधुनिकता और परंपरा के द्वंद्व, तथा पारिवारिक विघटन जैसी समस्याओं का विवेचन किया गया है । निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि मालती जोशी की कहानियाँ सामाजिक यथार्थ का संवेदनशील, मानवीय और प्रामाणिक दस्तावेज हैं, जो हिंदी कथा साहित्य को वैचारिक गहराई और सामाजिक प्रासंगिकता प्रदान करती हैं ।
डॉ. पायल & प्रतीक्षा सिंह
398-402
10.5281/zenodo.18075764