AD EDUXIAN JOURNAL

(A QUARTERLY MULTIDISCIPLINARY BLIND PEER REVIEWED & REFEREED ONLINE INTERNATIONAL JOURNAL)

YEAR: 2024

E- ISSN:3048-7951

देवा की माँ: मानवीय करुणा: स्त्री – वेदना और सामाजिक यथार्थ का व्यापक आख्यान

Abstract

कमलेश्वर की कहानी ‘देवा की माँ’ हिंदी साहित्य की उन महत्त्वपूर्ण कहानियों में से है, जो सामाजिक संरचना, जातिगत विडंबनाओं, गरीबी, स्त्री-अस्मिता और मानवीय करुणा को बड़े प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करती है। यह कहानी एक साधारण स्त्री ‘देवा की माँ’ के जीवन-संघर्ष, उसके त्याग, उसके संताप और उसके समाज द्वारा निर्मित अपमानजनक संदर्भों के भीतर उसकी नैतिक-आत्मिक मजबूती की कथा है। कहानी उस सामाजिक व्यवस्था का खुला दस्तावेज़ है जिसमें गरीब की तकलीफ़ किसी के लिए मायने नहीं रखती, और स्त्री की पहचान अक्सर उसकी सामाजिक भूमिका या संबंधों से ही तय की जाती है। कमलेश्वर अपनी तीक्ष्ण दृष्टि से न केवल उस स्त्री की त्रासदी को उजागर करते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि किस तरह एक माँ अपने अस्तित्व की सीमाओं से ऊपर उठकर अपने बेटे के लिए संसार से लड़ती है। यह लेख कहानी के सामाजिक यथार्थ, मनोवैज्ञानिक आयामों, प्रतीकात्मकता, स्त्री-स्वर, करुणा-दृष्टि, और कमलेश्वर की व्यापक साहित्यिक चेतना के संदर्भ में विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

Keynote: कमलेश्वर, देवा की माँ, हिंदी कहानी, सामाजिक यथार्थ, स्त्री-दृष्टि, करुणा और संघर्ष, गरीबी की विडंबना, मानवता, यथार्थवाद, समकालीन कहानी|

Acceptance: 15/11/2025

Published: 25/11/2025

Writer Name

लक्ष्मण कुमार पटेल

Pages

207-209

DOI Numbers

10.5281/zenodo.17703669