प्रस्तुत शोध-पत्र में कृत्रिम मेधा (Artificial Intelligence) की अवधारणा तथा हिंदी भाषा एवं साहित्य के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रचार-प्रसार में उसकी भूमिका का विश्लेषण किया गया है। कृत्रिम मेधा आधुनिक युग की एक क्रांतिकारी तकनीक है, जो मानव बुद्धि का अनुकरण करते हुए भाषा प्रसंस्करण, अनुवाद, वाक् पहचान, पाठ विश्लेषण तथा डिजिटल अभिलेखीकरण जैसे कार्यों को संभव बनाती है। शोध-पत्र में प्रतिपादित किया गया है कि वैश्वीकरण और अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव के बीच हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के संरक्षण और विकास के लिए कृत्रिम मेधा अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है। एआई आधारित तकनीकों के माध्यम से ग्रंथों, पांडुलिपियों, लोक साहित्य तथा लुप्तप्राय भाषाओं के साहित्य का डिजिटलीकरण, संरक्षण और बहुभाषिक अनुवाद संभव हो रहा है। प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP), मशीन लर्निंग, ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) तथा वाक् पहचान प्रणालियाँ हिंदी भाषा के डिजिटल विकास को नई दिशा प्रदान कर रही हैं। साथ ही, शोध-पत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संभावित जोखिमों और नैतिक चुनौतियों पर भी विचार किया गया है। निष्कर्षतः यह कहा गया है कि यदि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाएँ तकनीकी प्रगति के साथ कदमताल करती हैं, तो कृत्रिम मेधा उनके संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रतिष्ठा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
1. Logic and Artificial Intelligence, First published Wed Aug 27, 2003; substantive revision Fri Nov 2, 2018
2. Schank, Roger C. (1991). “Where’s the AI”. AI magazine. खण्ड 12 अंक. 4. पृ॰ 38.
3. शर्मा, बालेन्दु ‘दाधीच’,’ भाषाओं के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ स्वदेश डिजिटल, 21 Feb 2023, https://www.swadeshnews.in/swadesh-vishesh/artificial-intelligence-for-languages-853707
4. https://blog.mygov.in/editorial
5. गुप्ता, डॉ. एम.एल.’आदित्य’, ‘भाषा प्रौद्योगिकी सत्तर साल का सफरनामा’, गगनांचल मई-अगस्त 2017, पृ.17
6. शर्मा, बालेन्दु ‘दाधीच’ ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता करेगी हिंदी का कायाकल्प’ पाञ्चजन्य, 22 फरवरी 2023
7. https://economictimes.indiatimes.com/
8. गुप्ता, डॉ. एम.एल.’आदित्य’, ‘भाषा प्रौद्योगिकी सत्तर साल का सफरनामा’, गगनांचल मई-अगस्त 2017, पृ।17
डॉ. सीमा शर्मा
317-322
10.5281/zenodo.20580253
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