भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व की प्राचीनतम एवं समृद्ध चिंतन परंपराओं में से एक है, जिसमें मानव जीवन, प्रकृति, नैतिकता और आध्यात्मिकता का समन्वित स्वरूप देखने को मिलता है। इसी परंपरा के अंतर्गत बौद्ध दर्शन का उद्भव हुआ, जिसने वैदिक चिंतन को एक नवीन व्यावहारिक दिशा प्रदान की। बौद्ध दर्शन केवल धार्मिक विचारधारा न होकर भारतीय ज्ञान परंपरा की मानवीय चेतना, नैतिक अनुशासन, सह-अस्तित्व एवं करुणा का जीवंत प्रतिरूप है। प्रस्तुत शोध लेख में भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में बौद्ध दर्शन के मूल सिद्धांतों—करुणा, मध्यम मार्ग, प्रतीत्यसमुत्पाद, अनात्मवाद तथा अहिंसा—का विश्लेषण किया गया है। साथ ही यह अध्ययन आधुनिक शिक्षा, वैश्विक शांति तथा सतत विकास के संदर्भ में बौद्ध चिंतन की उपयोगिता को स्पष्ट करता है।
1. राधाकृष्णन, एस. — भारतीय दर्शन
2. राहुल सांकृत्यायन — बौद्ध दर्शन
3. आचार्य नरेंद्र देव — बौद्ध धर्म दर्शन
4. धर्मानंद कोसंबी — भगवान बुद्ध
5. दलाई लामा — The Art of Happiness
6. पालि त्रिपिटक साहित्य
7. नई शिक्षा नीति 2020
8. उपनिषद एवं भारतीय ज्ञान परंपरा संबंधी ग्रंथ।
श्वाती रानी, शोधार्थिनी, नीलाम्बर पीताम्बर विह्श्वविद्यालय, मोदी नगर, पलामू, झारखण्ड, बिहार
221-229
10.5281/zenodo.20369571
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