पूर्व-प्राथमिक शिक्षा बालक के समग्र विकास की आधारशिला मानी जाती है। जन्म से लगभग छह वर्ष की आयु तक का समय बालक के मस्तिष्क, भाषा, व्यवहार, सामाजिक कौशल एवं भावनात्मक विकास का सर्वाधिक संवेदनशील काल होता है। इस अवधि में प्राप्त अनुभव, शिक्षण-अधिगम की प्रक्रियाएँ तथा पारिवारिक एवं विद्यालयी वातावरण बालक के व्यक्तित्व के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में यह व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है कि गुणवत्तापूर्ण पूर्व-प्राथमिक शिक्षा न केवल विद्यालयी उपलब्धियों को बढ़ाती है, बल्कि आजीवन अधिगम, सामाजिक समायोजन, नैतिक विकास एवं जीवन-कौशलों की भी सुदृढ़ नींव रखती है।
ऋचा द्विवेदी ; डॉ. संध्या श्रीवास्तव
707-713
10.5281/zenodo.21536121
Never miss any important news. Subscribe to our newsletter.