हमारे देश में उच्च शिक्षा से जुड़े सभी लोगों ने उच्च शिक्षा की दशा को देख चिंता को व्यक्त किया है। हमारे देश में उच्च शिक्षा प्रणाली संस्थागत परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। यह बहुत लंबे समय से वित्तीय संसाधन, कक्षा, शिक्षक और कॉलेज/विश्वविद्यालय के छात्र जैसे विवादों में उलझा हुआ है। यह "बात और चाक" आगे बढ़ ही नहीं पा रहा। जब से राष्ट्र ने आर्थिक विकास और सामाजिक विभाग को बढ़ावा देने के लिए उच्च शिक्षा के मूल्य को मान्यता दी है, तब से सुधार के लिए दबाव बढ़ रहा है। राधा कृष्णन आयोग के समय से लेकर रस्तोगी समिति तक उच्च शिक्षा में सुधार का प्रयास किया गया। अतीत का विश्लेषण और भविष्य के लिए आवश्यकताओं का अनुमान समय की मांग है।
गौतम