वर्तमान युग में शिक्षा के क्षेत्र में ज्ञान, कौशल एवं व्यावसायिक दक्षता पर विशेष बल दिया जा रहा है, किन्तु नैतिक मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं तथा आध्यात्मिक विकास की उपेक्षा भी दृष्टिगोचर होती है। आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, तनाव, नैतिक मूल्यों के ह्रास तथा सामाजिक असमानताओं के कारण मूल्यपरक शिक्षा की आवश्यकता अनुभव की जा रही है। ऐसी परिस्थिति में गौतम बुद्ध के शैक्षिक विचार अत्यन्त प्रासंगिक प्रतीत होते हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य गौतम बुद्ध के शैक्षिक विचारों का अध्ययन करते हुए उनकी समकालीन प्रासंगिकता का विश्लेषण करना है। अध्ययन गुणात्मक शोध पद्धति पर आधारित है तथा ऐतिहासिक एवं दार्शनिक शोध दृष्टिकोण का प्रयोग किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि बुद्ध द्वारा प्रतिपादित सम्यक् दृष्टि, सम्यक् आचरण, नैतिकता, समानता, करुणा, अहिंसा, स्वतंत्र चिंतन तथा आत्मानुशासन जैसे सिद्धांत वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के लिए अत्यन्त उपयोगी हैं। इन सिद्धांतों के माध्यम से शिक्षा को अधिक मानवीय, मूल्यपरक तथा समाजोपयोगी बनाया जा सकता है। अतः आधुनिक युग में बुद्ध के शैक्षिक विचारों का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक है।
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रानी सिंह और प्रोफेसर हरिशंकर सिंह
405-412
10.5281/zenodo.20816396
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