AD EDUXIAN JOURNAL

(A QUARTERLY MULTIDISCIPLINARY BLIND PEER REVIEWED & REFEREED ONLINE INTERNATIONAL JOURNAL)
YEAR: 2024 E- ISSN:3048-7951

सरकारी विद्यालयों में शिक्षक व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों का मूल्यांकन: शिक्षण गुणवत्ता और विद्यार्थी अधिगम पर प्रभाव का अध्ययन

Acceptance: 02/12/2025

Published: 22/12/2025

Abstract

शिक्षा किसी भी समाज के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास का मूल आधार होती है और इस प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था निरंतर परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, जहाँ शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया केवल पाठ्यपुस्तक आधारित न होकर कौशल, नवाचार, तकनीक तथा जीवनोपयोगी दक्षताओं पर केंद्रित हो गई है। ऐसे परिवर्तित शैक्षिक परिदृश्य में शिक्षकों का सतत व्यावसायिक विकास (Teacher Professional Development – TPD) अत्यंत आवश्यक हो गया है। भारत में सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न व्यावसायिक विकास कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें NISHTHA, DIET आधारित प्रशिक्षण, SCERT/NCERT कार्यक्रम, ICT प्रशिक्षण, समावेशी शिक्षा एवं बाल-केंद्रित शिक्षण से संबंधित कार्यशालाएँ प्रमुख हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता, शिक्षण कौशल, कक्षा प्रबंधन क्षमता, मूल्यांकन रणनीतियों तथा डिजिटल साक्षरता में सुधार करना है। प्रस्तुत शोध-पत्र का मुख्य उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में संचालित शिक्षक व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों का समग्र एवं आलोचनात्मक मूल्यांकन करना है तथा यह विश्लेषण करना है कि इन कार्यक्रमों का शिक्षण गुणवत्ता और विद्यार्थी अधिगम परिणामों पर क्या प्रभाव पड़ता है। अध्ययन में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध प्रविधि को अपनाया गया है। इसके अंतर्गत 40 सरकारी विद्यालयों के 100 शिक्षकों को नमूने के रूप में चयनित किया गया। डेटा संग्रह हेतु प्रश्नावली, कक्षा-अवलोकन तथा विद्यार्थी उपलब्धि अभिलेखों का उपयोग किया गया। अध्ययन के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों से शिक्षकों में आत्मविश्वास, शिक्षण दक्षता एवं नवाचारी शिक्षण विधियों के प्रयोग में वृद्धि होती है। प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों की कक्षाओं में विद्यार्थियों की सहभागिता अधिक पाई गई तथा सीखने के परिणामों में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया। हालाँकि, यह भी सामने आया कि प्रशिक्षण की सीमित अवधि, व्यवहारिक पक्ष की कमी, अनुवर्ती सहयोग का अभाव तथा संसाधनों की अनुपलब्धता इन कार्यक्रमों की प्रभावशीलता को आंशिक रूप से सीमित करती है। यहअध्ययन नीति-निर्माताओं, शैक्षिक प्रशासकों एवं प्रशिक्षण संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत करता है।

Keynote: शिक्षक व्यावसायिक विकास, सरकारी विद्यालय, शिक्षण गुणवत्ता, इन-सर्विस प्रशिक्षण, अधिगम परिणाम, शैक्षिक सुधार

Author Name:

कुमारी सुनयना

Pages:

356-371

DOI Number:

10.5281/zenodo.18019823

Writer Name

कुमारी सुनयना

Pages

356-371

DOI Numbers

10.5281/zenodo.18019823

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