प्रस्तुत शोध प्रबंध छत्तीसगढ़ राज्य के 33 जिलों (विशेष संदर्भः बस्तर, सरगुजा, मध्य मैदानी एवं औद्योगिक अंचल) में संचालित समग्र शिक्षा अभियान के बहुआयामी प्रभावों का आलोचनात्मक विश्लेषण करता है। इसमें 10 प्रमुख शोध आयामों-छात्रों की शैक्षणिक उपलब्धि, शिक्षक प्रशिक्षण (NISHTHA), सामुदायिक सहभागिता (SMC), वनांचल चुनौतियां व पोटा केबिन मॉडल, डिजिटल शिक्षा व आई.सी.टी. प्रयोगशाला (ICT Lab), बालिका सशक्तिकरण (KGBV), वित्तीय प्रबंधन व प्रवाह (SNA/PFMS), TLM संसाधन, बुनियादी भौतिक ढांचा, तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में नीतिगत सुधारों- का वैज्ञानिक एवं प्रामाणिक सांख्यिकीय परीक्षण किया गया है। अध्ययन परिधिः कक्षा 1 से 12 (समग्र विद्यालयी सातत्य) संबद्ध संस्थानः अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर (छ.ग.) शोध-सार (Executive Abstract): प्रस्तुत शोध पत्र भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित एकीकृत विद्यालयी शिक्षा कार्यक्रम 'समग्र शिक्षा अभियान' (Samagra Shiksha Abhiyan) के सैद्धांतिक आधारों, संस्थागत महत्व, तथा छत्तीसगढ़ राज्य के विशेष संदर्भ में इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन और उपयोगिता का सघन विश्लेषणात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। वर्ष 2018-19 में पूर्ववर्ती तीन केंद्रीय योजनाओं-सर्व शिक्षा अभियान (SSA), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (RMSA), और शिक्षक शिक्षण (TE) - के समामेलन से गठित यह योजना प्री-स्कूल से 12वीं कक्षा तक एक अविभाज्य शैक्षणिक सातत्य (Educational Continuum) की परिकल्पना करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की संस्तुतियों के अनुरूप समग्र शिक्षा 2.0 का मूल उद्देश्य 'सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा' के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण, समतामूलक और समावेशी शिक्षा का सार्वभौमीकरण करना है। छत्तीसगढ़ राज्य की लगभग 32% जनजातीय आबादी, 44% सघन वनाच्छादित क्षेत्र, तथा बस्तर व सरगुजा अंचल की विशिष्ट भौगोलिक व आंतरिक सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलता के परिप्रेक्ष्य में यह योजना केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम न होकर सामाजिक न्याय का अनिवार्य साधन है। प्रस्तुत शोध पत्र में छत्तीसगढ़ के संदर्भ में दस प्रमुख शोध आयामों- (1) छात्रों की शैक्षणिक उपलब्धियां एवं सीखने के प्रतिफल, (2) शिक्षक प्रशिक्षण पहल एवं पेशेवर क्षमता, (3) सामुदायिक सहभागिता व शाला प्रबंधन समितियां, (4) ग्रामीण व जनजातीय वनांचल क्षेत्रों की चुनौतियाँ व समाधान, (5) डिजिटल शिक्षा व आई.सी.टी. प्रयोगशाला (ICT Lab) की भूमिका, (6) बालिकाओं की शिक्षा संवर्धन रणनीतियाँ, (7) वित्तीय प्रबंधन व बजटीय उपभोग प्रवृत्तियां, (8) शिक्षण अधिगम सामग्री (TLM) व संसाधनों की गुणवत्ता, (9) भौतिक बुनियादी अवसंरचना का योगदान, तथा (10) नीतिगत सुधार व रणनीतिक आवश्यकताएं- का आलोचनात्मक विश्लेषण किया गया है। अध्ययन प्राथमिक व द्वितीयक साक्ष्यों, यू-डायस प्लस (UDISE+), राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण (NAS) तथा फील्ड रिपोर्टों पर आधारित है।
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कोहन लाल साहू ; डॉ. विभा मिश्रा
173-191
10.5281/zenodo.22839965
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