AD EDUXIAN JOURNAL

(A QUARTERLY MULTIDISCIPLINARY BLIND PEER REVIEWED & REFEREED ONLINE INTERNATIONAL JOURNAL)
YEAR: 2024 E- ISSN:3048-7951

झारखंड में औद्योगीकरण और भूमि अधिग्रहण की राजनीति

Acceptance: 06/12/2025

Published: 30/12/2026

Abstract

झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य होने के बावजूद सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन की चुनौती का सामना कर रहा है। इस शोधपत्र में औद्योगीकरण और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया का राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में यह दर्शाया गया है कि औद्योगिक विकास ने जहाँ एक ओर आर्थिक वृद्धि और अवसंरचनात्मक विस्तार को बढ़ावा दिया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय आदिवासी समुदायों के विस्थापन, आजीविका संकट और सांस्कृतिक विघटन को भी जन्म दिया है। डेविड हार्वे की “Accumulation by Dispossession” तथा “Resource Curse Theory” के सैद्धांतिक ढांचे के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद विकास का लाभ समान रूप से वितरित नहीं हो पाया है। शोध में ऐतिहासिक, नीतिगत एवं आंदोलनात्मक आयामों का विश्लेषण करते हुए यह निष्कर्ष निकाला गया है कि वर्तमान विकास मॉडल असमान और बहिष्करणकारी है। अतः समावेशी एवं सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत सुधार, पारदर्शिता, तथा स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। 👉 झारखंड में औद्योगीकरण, भूमि अधिग्रहण और विस्थापन की राजनीति: एक समालोचनात्मक विश्लेषण

Keynote: औद्योगीकरण , भूमि अधिग्रहण, विस्थापन, आदिवासी समुदाय , झारखंड, समावेशी विकास|

Author Name:

महतो, डेगलाल

Pages:

513-517

DOI Number:

10.5281/zenodo.19615365

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Writer Name

महतो, डेगलाल

Pages

513-517

DOI Numbers

10.5281/zenodo.19615365

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