डिजिटल युग की शुरुआत के बाद से तकनीकी के क्षेत्र में कौशलों का विकास एक आवश्यक हिस्सा बन गया है। जिससे लोगों के पास व्यवसाय में बने रहने के लिए डिजिटल कौशल होना आवश्यक है। इस कोशिश की नींव एक मजबूत डिजिटल अवसंरचना है, जो कौशल व विकास के लिए आवश्यक प्लेटफॉर्म देता है। इस बदलाव को स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे सरकार की पहलों से तेजी मिली है, जो लोगों को डिजिटल साक्षरता और दक्षता को बढ़ाने व उनके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डिजिटल बुनियादी के विकास, शिक्षकों के लिए क्षमता निर्माण, ई-अधिगम प्लेटफॉर्म, डिजिटल सामग्री जो शिक्षा तक पहुँच को बढ़ाते हैं। डिजिटल सामग्री सीखने और सिखाने में सहायता के लिए खुले शैक्षिक संसाधनों, डिजिटल पुस्तकालयों और आभासी लैब के महत्व पर प्रकाश डालता है। डिजिटल साक्षरता के द्वारा शिक्षकों में शैक्षिक मानकों को बढ़ाने एवं प्रोत्साहित करने में सहायता मिलती है। प्रस्तुत शोधपत्र प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों के लिए डिजिटल अवसंरचना में नवाचारों को बढ़ावा व उनके द्वारा शिक्षण कौशलों एवं डिजिटल अवसंरचना - जैसे उच्च गति इंटरनेट, शैक्षिक सॉफ्टवेयर ई-सामग्री और अन्तःक्रियात्मक उपकरण प्राथमिक शिक्षकों की डिजिटल साक्षरता, नवाचारी शिक्षण विधियों, कक्ष-प्रबंधन कौशल तथा विशेष दक्षता को किस प्रकार उन्नत करती हैं। साथ ही इंटरनेट ऑनलाइन प्रमाणन पाठ्यक्रम, वेबीनार और डिजिटल सहयोगात्मक नेटवर्क शिक्षकों की रोजगार योग्यता को बढ़ाने में सहायता सहायक सिद्ध होते हैं क्योंकि वे उन्हें समकालीन शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम बनाते हैं। विद्यालयों में डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ करना और शिक्षकों में डिजिटल दक्षता का निर्माण करना, शिक्षण संगठन और लाभार्थियों के दृष्टिकोण के संदर्भ में समझा जाना चाहिए ताकि हितधारकों की डिजिटल आत्मसात करने की प्रेरणा को बढ़ाया जा सके। इसके लिए शिक्षा संस्थानों के साथ पेशेवर शिक्षण संगठनों के रूप में निरंतर जुड़ाव आवश्यक है, जिससे शिक्षक दक्षता निर्माण के लिए एक विकेन्द्रीकृत संदर्भ विकसित करने में सहायता मिलेगी।
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शर्मा, वैभव ; इन्द्राणी, डॉ. बीना
491-501
10.5281/zenodo.19405489
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