AD EDUXIAN JOURNAL

(A QUARTERLY MULTIDISCIPLINARY BLIND PEER REVIEWED & REFEREED ONLINE INTERNATIONAL JOURNAL)
YEAR: 2024 E- ISSN:3048-7951

तकनीकी समाज में नैतिक मूल्यों का संकट: शिक्षा और सामाजिक जीवन के संदर्भ में एक समालोचनात्मक अध्ययन

Acceptance: 04/02/2026

Published: 31/03/2026

Abstract

वर्तमान युग को निस्संदेह तकनीकी समाज का युग कहा जा सकता है, जहाँ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ने मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र शिक्षा, सामाजिक संरचना, आर्थिक गतिविधियों, संचार तथा प्रशासन को गहराई से प्रभावित किया है। तकनीकी विकास ने मानव जीवन को अधिक सुविधाजनक, तीव्र, कार्यकुशल और वैश्विक स्तर पर जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, परंतु इसके साथ-साथ इसने समाज में नैतिक मूल्यों के गंभीर संकट को भी जन्म दिया है। आज का समाज भौतिक प्रगति, उपभोक्तावाद, प्रतिस्पर्धा और तकनीकी दक्षता को जीवन की सफलता का प्रमुख मानदंड मानने लगा है, जिसके परिणामस्वरूप मानवीय संवेदनशीलता, सामाजिक उत्तरदायित्व, नैतिक विवेक और मूल्यबोध में निरंतर ह्रास देखा जा रहा है। प्रस्तुत शोध-पत्र का प्रमुख उद्देश्य तकनीकी समाज की प्रकृति एवं विशेषताओं का विश्लेषण करते हुए यह अध्ययन करना है कि तकनीकी विकास किस प्रकार नैतिक मूल्यों के संकट को जन्म देता है। शोध में यह स्पष्ट किया गया है कि तकनीक आधुनिक समाज में केवल सहायक साधन न रहकर मानव जीवन की दिशा निर्धारित करने वाली शक्ति बन गई है। मशीनों और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता, स्वचालन, तीव्रता और दक्षता पर अत्यधिक बल ने मानवीय संवेदनाओं और नैतिक निर्णय क्षमता को प्रभावित किया है। सोरोकिन (1941) के विचारों के संदर्भ में यह प्रतिपादित किया गया है कि आधुनिक समाज गंभीर सांस्कृतिक एवं नैतिक संकट से गुजर रहा है, जहाँ व्यक्ति नैतिक मूल्यों की अपेक्षा भौतिक सुखों और आधुनिकता को सर्वोच्च महत्व देने लगा है। इस शोध में शिक्षा प्रणाली में नैतिक मूल्यों की वर्तमान स्थिति का भी समालोचनात्मक अध्ययन किया गया है। आज की शिक्षा प्रणाली अधिकतर परीक्षा-केन्द्रित, रोजगार-मुखी और कौशल-आधारित हो गई है, जहाँ चरित्र निर्माण और मूल्य शिक्षा को गौण स्थान प्राप्त हो रहा है। परिणामस्वरूप विद्यार्थी तकनीकी रूप से दक्ष तो बन रहे हैं, परंतु नैतिक रूप से कमजोर, आत्मकेंद्रित और सामाजिक दायित्वों के प्रति उदासीन होते जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, तकनीकी समाज का सामाजिक जीवन पर पड़ने वाले नैतिक प्रभावों जैसे संयुक्त परिवारों का विघटन, पारिवारिक संवाद की कमी, सामाजिक अलगाव, भावनात्मक दूरी और संवेदनहीनता का भी विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध विधि का प्रयोग किया गया है तथा द्वितीयक स्रोतों से प्राप्त तथ्यों का उपयोग किया गया है। शोध का निष्कर्ष यह संकेत देता है कि तकनीक स्वयं न तो नैतिक है और न ही अनैतिक, बल्कि उसका प्रभाव मानव के उपयोग, दृष्टिकोण और नैतिक नियंत्रण पर निर्भर करता है। अंततः इस शोध-पत्र में यह प्रतिपादित किया गया है कि नैतिक मूल्यों के पुनर्निर्माण में शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि शिक्षा प्रणाली तकनीकी विकास के साथ-साथ मूल्य-आधारित शिक्षा, मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व को केंद्र में स्थापित करे, तो तकनीकी समाज को अधिक मानवीय, संतुलित और नैतिक बनाया जा सकता है।

Keynote: तकनीकी समाज,नैतिक मूल्य,शिक्षा और सामाजिक जीवन

Author Name:

कुमार, आयुष ; इन्द्राणी, डॉ. बीना

Pages:

481-490

DOI Number:

10.5281/zenodo.19400962

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Writer Name

कुमार, आयुष ; इन्द्राणी, डॉ. बीना

Pages

481-490

DOI Numbers

10.5281/zenodo.19400962

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