प्रस्तुत शोध पत्र के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम (1857) में महिला शासिकाओं की भूमिका को रानी लक्ष्मीबाई और अवंतीबाई लोधी के विशेष संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में लक्ष्मीबाई और अवंतीबाई ने उन परंपरागत सामाजिक रूढ़ियों को खंडित किया है जिनमें भारतीय नारी को चार दिवारी के भीतर की वस्तु समझा जाता था। इन वीरांगनाओं ने न केवल अपने भारतीय सुसंस्कारों का अनुसरण कर अपने पारिवारिक दायित्वों को निभाया अपितु आवश्यकता पड़ने पर अपनी धरती मां भारती के लिए फिरंगियों के सामने समर्पण से बेहतर युद्ध के मैदान में अपने से कई गुना ताकतवर शत्रु से लोहा लेकर वीरों की भांति अपने प्राणों का बलिदान देकर मृत्यु का वरण करना उचित समझा। इन महिला शासिकाओं ने 1857 की क्रांति में यह प्रमाणित कर दिखाया की नारी पुरुष रूपी बैसाखी पर निर्भर न रहकर वह उसकी अनुपूरक है, वह भी युद्ध में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली वीरांगना है। वास्तव में 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में केवल पुरुषों ने ही बढ़-चढ़कर भाग नहीं लिया महिलाओं ने भी उसमें प्रचंड दुर्गा समान शत्रु का नरसंहार किया है। इन वीरांगनाओं ने आने वाले विभिन्न स्वतंत्रता आंदोलनों में नारी शक्ति के लिए प्रवेश मार्ग खोलने के साथ-साथ उनके लिए प्रेरणा स्रोत के रूप में कार्य भी किया है। अतः इस शोध के माध्यम से रानी लक्ष्मीबाई और अवंती बाई के 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अदम्य साहस और शौर्य को रेखांकित कर उनको प्रेरणा स्रोत के रूप में स्थापित कर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा सकता है।
1. सावरकर, विनायक दामोदर, द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस-1857, प्रकाशन 1909
2. ग्रोवर, बी.एल. एवं यशपाल, अलका मेहता, आधुनिक भारत का इतिहास, नई दिल्ली, 2018, पृष्ठ-186
3. पारसनीय, श्रीयुत दत्तात्रेय बलवंत की मराठी पुस्तक, ‘झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का हिंदी अनुवाद, प्रयाग, 1962, पृष्ठ-2
4. तिवारी, गोरेलाल, बुंदेलखंड का संक्षिप्त इतिहास, इलाहाबाद प्रथम संस्करण, पृष्ठ-346
5. भारत के नारी रत्न, प्रशासन- सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली 2021, पृष्ठ-59.
6. वर्मा, वृंदावनलाल उपन्यास रामगढ़ की रानी अवंतीबाई, पृष्ठ-93
7. भूषण, सारंग, रामगढ़ के राजा तब और अब, पृष्ठ-16
8. महदेले, संत कवि केशवदास लोधी, लोधी क्षत्रिय पुराण, पृष्ठ-58,59
9. इरस्किन, मेजर डब्लू.सी., नरेटिव्स ऑफ इवेंट्स 1857-58, पृष्ठ -415
10. त्रिपाठी, डॉ के.पी., रानी झांसी- लक्ष्मीबाई का शहीद/बलिदान दिवस, बुंदेलखंड का वृहद इतिहास, पृष्ठ-372,73
11. ठाकुर, श्री हीरासिंह, रामगढ़ की रानी वीरांगना अवंतीबाई (आलेख), बुंदेली दस्तक भोपाल, पृष्ठ-44
12. भारत के नारी रत्न, प्रशासन- सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली, 2021, पृष्ठ-59
13. खरे, डॉ डी.पी.‘प्रसाद‘, वीरांगना अवंतीबाई: साहित्य के झरोखे में (लेख), बुंदेली बसंत, 2007, पृष्ठ- 49,50
सिंह, नीलेश; मिश्रा, डॉ मुक्ता
414-418
10.5281/zenodo.19313395
Never miss any important news. Subscribe to our newsletter.