AD EDUXIAN JOURNAL

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YEAR: 2024 E- ISSN:3048-7951

1857 के स्वतंत्रता संग्राम में महिला शासिकाओं की भूमिका: रानी लक्ष्मीबाई और अवंतीबाई लोधी के विशेष संदर्भ में

Acceptance: 04/02/2026

Published: 30/03/2026

Abstract

प्रस्तुत शोध पत्र के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम (1857) में महिला शासिकाओं की भूमिका को रानी लक्ष्मीबाई और अवंतीबाई लोधी के विशेष संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में लक्ष्मीबाई और अवंतीबाई ने उन परंपरागत सामाजिक रूढ़ियों को खंडित किया है जिनमें भारतीय नारी को चार दिवारी के भीतर की वस्तु समझा जाता था। इन वीरांगनाओं ने न केवल अपने भारतीय सुसंस्कारों का अनुसरण कर अपने पारिवारिक दायित्वों को निभाया अपितु आवश्यकता पड़ने पर अपनी धरती मां भारती के लिए फिरंगियों के सामने समर्पण से बेहतर युद्ध के मैदान में अपने से कई गुना ताकतवर शत्रु से लोहा लेकर वीरों की भांति अपने प्राणों का बलिदान देकर मृत्यु का वरण करना उचित समझा। इन महिला शासिकाओं ने 1857 की क्रांति में यह प्रमाणित कर दिखाया की नारी पुरुष रूपी बैसाखी पर निर्भर न रहकर वह उसकी अनुपूरक है, वह भी युद्ध में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली वीरांगना है। वास्तव में 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में केवल पुरुषों ने ही बढ़-चढ़कर भाग नहीं लिया महिलाओं ने भी उसमें प्रचंड दुर्गा समान शत्रु का नरसंहार किया है। इन वीरांगनाओं ने आने वाले विभिन्न स्वतंत्रता आंदोलनों में नारी शक्ति के लिए प्रवेश मार्ग खोलने के साथ-साथ उनके लिए प्रेरणा स्रोत के रूप में कार्य भी किया है। अतः इस शोध के माध्यम से रानी लक्ष्मीबाई और अवंती बाई के 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अदम्य साहस और शौर्य को रेखांकित कर उनको प्रेरणा स्रोत के रूप में स्थापित कर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जा सकता है।

Keynote: महिला शासिका, वीरांगना, लक्ष्मीबाई, अवंतीबाई, बलिदान, आत्म-सम्मान, झांसी, रामगढ़, अंग्रेज, आत्मोत्सर्ग, स्वतंत्रता संग्राम, रियासत आदि।

Author Name:

सिंह, नीलेश; मिश्रा, डॉ मुक्ता

Pages:

414-418

DOI Number:

10.5281/zenodo.19313395

Reference

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Writer Name

सिंह, नीलेश; मिश्रा, डॉ मुक्ता

Pages

414-418

DOI Numbers

10.5281/zenodo.19313395

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